4. चतुर्थ चैत्यवंदन: श्री सिद्धाचल (The Holy Hill - Siddhachal)
"जो प्रसाद (अर्ध्य, जल, फूल) मैंने भगवान को चढ़ाया, उसे मैं संसार के सभी प्राणियों को समर्पित करता हूँ।" palitana 5 chaityavandan in hindi full
शुद्ध भाव और मौन के साथ यात्रा करने से आध्यात्मिक लाभ अधिक मिलता है। सोलम तीर्थंकर देव
अच्युत कल्पथी आविया, सोलम तीर्थंकर देव;शांति सुधा रस पीववा, सुरनर साधे सेव।भावे जे नर पूजशे, धरी मनमां सद्भाव;तेहने सुख संपत्ति मिले, कटे सकल भव भाव। शांति सुधा रस पीववा
पुंडरीक स्वामी भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर थे, जिन्होंने इसी पर्वत पर निर्वाण प्राप्त किया था。 स्थान:
पालीताणा के केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का एक वैज्ञानिक अभ्यास है। यह हमें सिखाता है कि जैसे हम पाँच बार झुकते हैं, वैसे ही हमें अपने अंदर के पाँच दोषों— क्रोध, अहंकार, छल, लोभ और अज्ञान— को बार-बार प्रणाम करके समाप्त करना है।